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गुलामी की मानसिकता मिटाने के राह पर है भार

 गुलामी मिटाने के राह पर है भारत



लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि सीआरपीसी में 484 धारा थी अब इसमें से 531 धारा हो गई है।

बुधवार को 20 दिसंबर को अपराधी कानून संशोधन से जुड़े तीन नए बिल को पास किया गया है ।मोदी सरकार सीआरपीसी आईपीसी की जगह भारतीय न्याय संहिता बिल 2023 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य बिल 2023 लेकर आई ।लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार अंग्रेजों के जमाने को कानून को बदलकर एक नया बदलाव कर रही है ।जिसे गुलामी की मानसिकता से हम लोग आगे ऊपर उठने की कोशिश करेंगे।


 संसद में अमित शाह ने क्या बोले


गृह मंत्री ने आपराधिक न्याय प्रणाली से संबंधित तीन नए विधेयक पर लोकसभा में जवाब देते हुए कहा है कि नए कानून व्यक्ति की स्वतंत्रता मानव के अधिकार और सबके साथ समान व्यवहार के तीन सिद्धांत पर आधारित किए गए हैं ।आजादी के बाद एक पहली बार यह जो आपराधिक न्याय प्रणाली से जुड़े तीन कानून है। उसको अमल में लाया गया है जो मानवीय कारण होगा।

गुलामी की मानसिकता मिटाने के राह पर है भार

 गृह मंत्री ने कहा कि अपराध रेप में नए कानून के तहत इस अपराध में फांसी की सजा दिया जाएगा । उन्होंने कहा कि मैं तीन विधेयकों को बहुत ही गहराई से पढ़ा और इसे बनाने से पहले 158 परामर्श व्यक्ति ने भाग लिया है ।अमित शाह ने बनाया बताया कि पहले रेप में 375, 376 धारा लगती थी ।अब जहां अपराधों के बाद शुरू होती है। उसमें 63 और 69 में करीब को रखा गया है ।बच्चों के खिलाफ अपराध को भी आगे लाया गया है।

नए कानून में रेप और मर्डर 


 मर्डर 33001 में है गैंगरेप का आरोपी 20 साल की सजा तक या जिंदा रहने तक जेल में सब सकता है। लोक सभा गृह मंत्री अमित शाह ने एक बार फिर कहा है कि सीआरपीसी में 484 धारा के जगह और 531 धारा होगी ।जिसमें 177 धाराओं में बदलाव किए गए हैं और नहीं 9 नहीं धारा जोड़ी गई है ।और इसके साथ 39 में जोड़ी गई है और 44 में प्रधान जोड़े गए हैं।


 बता दे की न्याय सही तक भारत नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम विधायक अगस्त में लोकसभा में पेश किए गए थे ।कम से आपराधिक प्रक्रिया के तहत संहिता अधिनियम 1898 भारतीय दंड संहिता 1860 और भारतीय साक्षर अधिनियम 1872 को बदल करने बदलकर इन तीनों कानून को लाया गया है। लकी बाद में उन्हें वापस ले लिया गया और उन्हें समीक्षा के लिए बीजेपी सांसद लाइव बृजलाल की अध्यक्षता में 31 सदस्य स्थाई समिति के पास भेजा गया ।


विशेष संघ और बहुत सारे लोगों से विचार करने के बाद पिछले सप्ताह लोकसभा में या बिल पास किया गया। सरकार ने दावा क्या आपराधिक कानून से जुड़े हुए तीन बिल को जनता के लिए है। और उसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों की सुरक्षा संवैधानिक सुरक्षा मानवीय सुरक्षा व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा करना। गृह मंत्री साहब ने अभी कहा है कि ब्रिटिश शासन के दौरान ले गए कानून जो थे ।वह गुलामी की मानसिकता को याद दिलाती थी। इसलिए इन तीनों को बदल दिया गया और इसके साथ इसमें उसे सजा देने का उद्देश्य भी बदल दिया गया है ।


जब पिछले हफ्ते में यह बिल प्रयास किए गए तब कांग्रेस के फ्लोर लीडर अधीर रंजन चौधरी ने सरकार से तीनों बिलों के एक्शन चरण समिति को भेजने के लिए कहा था इसी के साथ गृह मंत्री अमित शाह ने उनसे इनकार कर दिया था इस पर पर जोर दिया गया कि ऐसे करने में कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि गिरी मामलों में गिरी मामलों में संसदीय स्थान स्थाई समिति ने उसकी समीक्षा की है

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